नमस्कार दोस्तों, सुबह उठते ही पहले 10 से 15 मिनट में आप क्या करते हो, यह आपके पूरे दिन को शेप देता है। ज्यादातर लोगों की मॉर्निंग हैबिट्स अलग होती है। बस कुछ ऐसे एक्शन होते हैं जो उनके अंदर स्ट्रेस बढ़ाकर उनकी मेंटल परफॉर्मेंस को पूरे दिन के लिए घटा देते हैं और ऐसे में आपको किसी महान इन्वेंटर या थिंकर के मॉर्निंग रूटीन को कॉपी करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हर इंसान के स्टेडी, मोटिवेशन, स्लीप रिक्वायरमेंट्स और अवेलेबल फैसिलिटीज अलग होती हैं। जहां टेस्ला के सीईओ इलोन मस्क बोलते हैं कि वह सिर्फ छह घंटे की नींद के साथ ही ऑप्टिमम फंक्शन कर पाते हैं, वहीं एमेजॉन के फाउंडर जेफ बेजोस बोलते हैं कि उन्हें आठ घंटे की नींद तो चाहिए ही चाहिए। यानी किसी भी इंसान का रुटीन और उसके स्पेसिफिक एलिमेंट्स हर इंसान पर अप्लाय नहीं होते हैं। तभी आज हम सिर्फ उन्हीं हैबिट्स को पढ़ेंगे जो मैजोरिटी पॉपुलेशन की मेंटल क्लैरिटी और ओवरऑल परफॉर्मेंस बढ़ान में मदद कर सकती है। 

1) जैसे ही आपका अलार्म बजे तब स्नूज बटन दबाओ और एक ही बार में उठ जाओ। क्योंकि जब भी हम बार बार अलार्म को बंद करके सो जाते हैं, तब उससे हमारी सर्किट रिदम यानी बॉडी क्लॉक नेगेटिव इन्फ्लुएंस होती है। यह इसलिए होता है, क्योंकि हमारी नींद के अलग अलग फेज होते हैं। जैसे ही हम बेड पर लिखते हैं और हमें नींद आने लगती है, वैसे ही हम नींद के पहले स्टेज में एंटर करने लग जाते हैं। सोने के 5 से 10 मिनट बाद हम स्लीप साइकल के दूसरे स्टेज में पहुंचते हैं, जिसे बोलते हैं लाइट्स लीवर। इस स्टेज में हमारी बॉडी का टेम्प्रेचर कम हो जाता है और हार्ट रेट स्लो हो जाता है और यूजर सोने के 1 से 2 घंटे के अंदर हम थर्ड स्टेज यानी डीप स्लीप में एंटर करते हैं। इस फेज में हमारी बॉडी टिशूज, टेंडन या मसल्स की मरम्मत करती है और इसके बाद आता है रेम स्लीप स्टेज यानी रैपिड आई मूवमेंट, इस स्टेज में आप सपने देखते हो और आपकी नींद सबसे गहरी होती है और इस तरह से हम सोते हुए 90 मिनट की ऐसी 4 से 5 साइकल्स कंप्लीट करते हैं। लेकिन सुबह के टाइम जब हमारा अलार्म बजता है और हम रेम स्लीप में होते हैं, तब स्नूज बटन दबाने पर हम फिर से स्लीप साइकिल में चले जाते हैं और रिपीट सिल्ली नींद में जाना और बाहर आना उठने के बाद हमें थका हुआ महसूस कराती है। इसलिए जब भी आपका अलार्म बजे तब अपनी प्रोडक्टिविटी हाइएस्ट लेवल पर रखने के लिए एक ही बार में उठ जाओ।

2) आप उठते ही अपने फोन की नोटिफिकेशन्स चेक करने लग जाते हो, क्योंकि आजकल सबकी आदत यही बन चुकी है। पहले वह अपना फोन चेक करते हैं और फिर कोई अगला काम करते हैं। लेकिन यह आदत आपके माइंड और ओवरऑल प्रोडक्टिविटी के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। क्योंकि उठते ही जब आप अपनी फीड को स्क्रोल करते हो और नोटिफिकेशन को पढ़ते हो तब यह चीज आपके दिमाग को इंफॉर्मेशन से ओवरलोड कर देती है जो आपके अंदर स्ट्रेस और एंजाइटी को बढ़ती है। इसलिए अपने फोन को उठते ही यूज करने के बजाय अपने आपको 15 मिनट का समय दो ताकि आप पहले पूरी तरह से एक वेक स्टेट में आ जाएं और उसके बाद अपने फोन को टच करें।

3) जैसे ही आप उठो, अपने बेड पर लेग्स फोल्ड करके बैठो और बस कुछ सेकेंड या 1 से 2 मिनट तक अपने गोल्स को विजुअलाइज करो कि आपको कहां जाना है और आपका फ्यूचर कैसा हो। अपने आप को याद दिलाएं कि आप क्यों जी रहे हो और आपने अपनी लाइफ में क्या करना है। ऐसा करने से आप अपने दिमाग के सबकॉन्शियस माइंड को ट्रेन कर पाते हैं कि वह आपका फोकस आपके गोल्स तक पहुंचने में ही रखें, क्योंकि यह चीज आपके लिए सबसे जरूरी है। इसके साथ ही यह विजुअलाइजेशन आपको पॉजिटिविटी से भर देगी और यह फीलिंग सुबह सुबह बहुत जरूरी होती है, क्योंकि आपकी यही एनर्जी आपको पूरे दिन मोटिवेटेड रखती है।

4) अपनी सराउंडिंग को ऑर्गनाइज करो यानी जब आप विजुअलाइज कर लेते हो तब उसके बाद अपने बेड से उठो और अपने आसपास हर चीज को उसकी सही जगह पर रखो। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट बोलते हैं कि हमारी सराउंडिंग डायरेक्ट रिफ्लेक्शन होती है, हमारे थॉट्स और फीलिंग्स की। जिसकी वजह से अगर आपके रूम में हर चीज इधर उधर फैली हुई है और कुछ भी सिमटा नहीं है, तो वह दिखाता है कि आपके मन में भी हर चीज बिखरी हुई है। इसलिए उठते ही अपने बेड को बनाओ और अपनी सराउंडिंग को ऑर्गनाइज करो।

5) एक ग्लास गरम पानी का प्रयोग : लोग अक्सर सोचते हैं कि माइंड को हेल्दी बनाने के लिए हमें बस उन हैबिट्स पर ध्यान देना है जो डायरेक्टली हमारे माइंड से ही रिलेटेड होती हैं। लेकिन यह गलत थिंकिंग है क्योंकि हमारी बॉडी एक इंटीग्रेटिड सिस्टम की तरह काम करती है, जिसमें हर एक चीज दूसरी चीज से जुड़ हुई होती है। अगर शरीर के एक हिस्से में प्रॉब्लम है तो वह चीज दूसरी जगह को भी अफेक्ट करेगी। इसलिए विजुअलाइज और ऑर्गनाइज करने के बाद एक ग्लास गरम पानी पीएं। इससे आप अपने डाइजेस्टिव सिस्टम को दिन के लिए तैयार कर पाओगे और जो भी टॉक्सिन्स रात को आपके अंदर इकट्ठे हुए हैं, आप उन्हें बाहर निकाल पाओगे। साथ ही साथ अगर आप एक लेवल और आगे जाना चाहते हो तो आप गरम पानी से पहले ऑयल पुलिंग यानी तिल के तेल के साथ गरारे भी कर सकते हो जो टॉक्सिंस को बाहर लाने में और भी हेल्पफुल होगा।

6) लाइट स्ट्रेचिंग करो क्योंकि सोते समय आप घंटों तक एक ही पोजिशन में रहते हो जिससे आपकी मसल्स टाइट हो जाती हैं। हमारे अंदर यह हैबिट नेचुरली भी होती है कि हम उठते ही अपने हाथों को फैलाकर टाइट मसल्स को रिलीज करने की कोशिश करते हैं ताकि हमारी मसल्स में ब्लड फ्लो बढ जाए और हम दिनभर के टास्क के लिए रेडी हो जाएं।

छह मॉर्निंग हैबिट्स कोई भी असानी से अपने रुटीन में ऐड कर सकता है और अपने दिन को एक नई एनर्जी, मोटिवेशन और पॉजिटिविटी के साथ शुरू कर सकता है। ऐसे ही जानकारी पाने के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए |